रांची । आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष तिथि द्वितीया दिन गुरुवार 16जुलाई को भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर मौसीबाड़ी पहुंचे। रथ की डोर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, मंत्री विधायक और लाखों श्रद्धालुओं ने थाम कर गगनभेदी जयघोष के करते मौसी बाड़ी पहुंचाया। भगवान मौसी बाड़ी में 25 जुलाई तक रहेंगे। इसके बाद वह फिर घूरती रथ के दिन अपने घर लौट जायेगे

रांची में यह भगवान जगन्नाथ की 335 वीं रथ यात्रा निकाली गयी। इसकी शुरुवात वर्ष 1691 में नागवंशी शासक अनिनाथ शाहदेव ने की है। उन्हें यह प्रेरणा पुरी के जगन्नाथ मंदिर से मिली। लेकिन आज तक रथ यात्रा में कोई परंपरा में बदलाव नहीं आया है
शुरू से एक परंपरा चलते आया है। वहीं कोरोना काल के दौरान वर्ष 2020 और 2021 में रथ यात्रा स्थगित रही। उन वर्षों में मंदिर के गर्भगृह में ही भगवान की पूजा अर्चना की गयी थीं।

रथ यात्रा में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने परिवार संग शामिल हुए। झारखंड सरकार के मंत्री और विधायक भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने जय जय जगन्नाथ के नारे लगाते हुए भगवान के रात की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने मौके पर कहा कि सरकार जगन्नाथ मंदिर को जोड़ने वाली मार्ग पर तोरण द्वार बनाया जायेगा ताकि मंदिर मंदिर की पहचान दूर से ही हो जायें।
वहीं मेला परिसर में हजारों दुकानों ने अपने अपने स्टॉल लगाएं है। मेले में तलवार, जाता, जाल, ढोलक, नगाड़ा, तरह तरह के मिठाई, बच्चों के खेलने के लिए खिलौने। कपड़ा, तोता, चिड़िया, सेल्फी स्टिक, तीर धनुष, कृषि औजार। पारंपरिक औजार, सहित तरह तरह के समान मिल रहा है।

जगन्नाथपुर रथ यात्रा मेला में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गये है।
सीसीटीवी कैमरा से निगरानी हो रही है। सुरक्षा प्रबंध चाक चौबंद बनाये रखने के लिए 4000 से अधिक पुलिस के जवान लगाए गए हैं। रांची डीसी एसएसपी सहित अन्य अधिकारी स्वयं व्यवस्था पर निगरानी रख रहे हैं।

रथ मेला के दिन काफी संख्या में लोग मउर की पूजा अर्चना की। इसके बाद उसे मालाकारो को सौंप दिया। मालाकारो ने विधि विधान से पूजा करायी। बदले में लोगों ने कुछ दक्षिणा भी उन्हें दी।








