पश्चिम बंगाल में ईंट-पत्थर छोड़ एग वार से दिखा करप्शन का मुकाबला


New Delhi: पश्चिम बंगाल में साल 2026 के ऐतिहासिक विधानसभा चुनाव और उसके बाद हुए सत्ता परिवर्तन के बाद भी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं की मुश्किलें और सामाजिक फजीहत कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। राज्य भर में जहां भी टीएमसी के नेता, पार्षद या पूर्व मंत्री नजर आ रहे हैं, उन्हें जनता के भयंकर और अभूतपूर्व आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इस बार बंगाल की सड़कों पर विरोध का जो अनूठा तरीका दिखाई दे रहा है, उसने देश के बड़े-बड़े सियासी रणनीतिकारों और समाजशास्त्रियों को भी पूरी तरह हैरान कर दिया है। प्रदर्शनकारी अब नेताओं पर लाठी-डंडे, ईंट-पत्थर या पारंपरिक जूता-चप्पल नहीं चला रहे हैं, बल्कि हर तरफ से केवल और केवल कच्चे और सड़े हुए अंडों की मूसलाधार बौछार हो रही है। इस नए चलन के तहत अभिषेक बनर्जी से लेकर मदन मित्रा, सव्यसाची दत्ता और बापादित्य दासगुप्ता जैसे दिग्गज नेताओं के चेहरों, कपड़ों और महंगी गाड़ियों को आक्रोशित जनता ने बदबूदार अंडों से पाट दिया है।

अंडों से खून नहीं बहता और सहानुभूति नहीं मिलती

प्रदर्शनकारियों द्वारा ईंट-पत्थर छोड़कर अंडों को अपना सबसे बड़ा और मारक हथियार बनाने के पीछे एक बहुत गहरी सियासी, कानूनी और मनोवैज्ञानिक चाल छिपी है। दरअसल, अगर जनता नेताओं पर पत्थर या लाठी चलाती है, तो उन्हें शारीरिक चोट लगेगी और खून बहेगा, जिससे मीडिया और समाज के एक वर्ग में उनके प्रति सहानुभूति पैदा होने का खतरा रहता है। इसके बिल्कुल उलट, जब किसी कद्दावर नेता पर सरेआम अंडा फूटता है, तो उसे कोई शारीरिक क्षति नहीं होती, बल्कि उसकी भयंकर सामाजिक और मानसिक बेइज्जती होती है। नेताओं के कड़क सफेद कुर्ते पर जब अंडे का पीला-सफेद चिपचिपा और बदबूदार लिक्विड बिखरता है, तो उनका पूरा राजनीतिक अहंकार सरेआम तार-तार हो जाता है। जनता का सीधा मकसद उन्हें अस्पताल भेजना नहीं, बल्कि समाज में उनकी साख को पूरी तरह मटियामेट करना है। इसके साथ ही, यह कड़क कानूनी धाराओं और जेल की सजा से बचने का सबसे आसान लूपहोल भी है।

मामूली धाराओं में होता है मामला दर्ज

प्रदर्शनकारी जानते हैं कि लाठी या पत्थर चलाने पर पुलिस तुरंत ‘जानलेवा हमला’ (अटेम्प्ट टू मर्डर) या दंगा भड़काने जैसी गंभीर गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सकती है, जबकि अंडा फेंकना कानून की भाषा में केवल ‘पब्लिक न्यूसेंस’ या मामूली हमला माना जाता है, जिससे प्रदर्शनकारी आसानी से बच निकलते हैं।

कट मनी और रंगदारी से करोड़े वसूलते थे

पश्चिम बंगाल की जनता का यह गुस्सा अचानक नहीं फूटा है, बल्कि इसके पीछे सालों से दबा हुआ आक्रोश है। स्थानीय लोगों, ऑटो चालकों और छोटे व्यापारियों का आरोप है कि नेताओं ने सत्ता में रहते हुए उनसे ‘कट मनी’ और अवैध रंगदारी के रूप में करोड़ों रुपये वसूले थे। मिदनापुर में आवास योजना के नाम पर भारी रकम डकारने वाले एक स्थानीय नेता की गाड़ी पर जनता ने जमकर अंडे बरसाए। लोगों का मानना है कि जिन नेताओं ने सिंडिकेट राज और भ्रष्टाचार से अपने हाथ गंदे किए हैं, उन्हें उसी भाषा में जवाब मिलना चाहिए। यही वजह है कि सड़े अंडे की असहनीय दुर्गंध को इस ‘बदबूदार करप्शन’ के खिलाफ एक सटीक प्रतीक माना जा रहा है। इस एग अटैक की शुरुआत बीती 30 मई को सोनारपुर से हुई थी, जब अभिषेक बनर्जी एक समर्थक के परिवार से मिलने पहुंचे और भीड़ ने उन्हें घेरकर अंडों से हमला कर दिया। स्थिति इतनी विकट थी कि उन्हें सुरक्षा के लिए हेलमेट पहनना पड़ा और कई अंडे उनके हेलमेट पर ही फूटे। इसके बाद कमरहटी में मदन मित्रा के काफिले और अलीपुर कोर्ट ले जाते समय बापादित्य दासगुप्ता को भी भीड़ ने सैकड़ों अंडों से नहला दिया।

सड़े अंडों की कीमत बढ़ी है: मंत्री घोष

इस अनोखे विरोध प्रदर्शन पर नवनिर्वाचित सरकार के कैबिनेट मंत्री दिलीप घोष ने भी बेहद मजाकिया अंदाज में तंज कसा है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि आजकल बाजारों में अच्छे अंडों से ज्यादा सड़े और बदबूदार अंडों की कीमत बढ़ गई है और वे आसानी से मिल भी नहीं रहे हैं। उन्होंने तंज कसा कि टीएमसी की रैलियों में जो ‘डिम-भात’ (अंडा-चावल) बेहद मशहूर था, आज जनता ने उनसे चावल और पकाने का मौका दोनों छीन लिया है, इसलिए नेताओं को सरेआम जनता के हाथों कच्चे अंडे खाने पड़ रहे हैं। दूसरी ओर, केंद्रीय एजेंसियों की ताबड़तोड़ कार्रवाई के डर से नेताओं में इस कदर खौफ है कि हावड़ा के आमता इलाके में चुनावी हिंसा का एक आरोपी टीएमसी कार्यकर्ता पुलिस छापेमारी के दौरान घर में साड़ियों के ढेर के नीचे छुपा मिला, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वहीं कूचबिहार में कट मनी के आरोपी एक अन्य नेता ग्रामीणों के डर से अपने ही घर में खाट के नीचे दुबक गए। सरकार के मंत्रियों का कहना है कि यह जनता का सालों का दर्द है जो अब पूरी तरह खुलकर बाहर आ रहा है।

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