सिंदुआर टोला ग्रामोदय विकास विद्यालय ने 6 बच्चों को मुक्त कराया बाल मजदूरी से

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रांची। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर सिंदुआर टोला ग्रामोदय विकास विद्यालय रांची ने जिला प्रशासन एवं पुलिस के सहयोग से 6 बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया I
रांची जिले में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए काम कर रहे संस्था सिंदुआर टोला ग्रामोदय विकास विद्यालय रांची ने विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के मौके पर जिला प्रशासन एवं पुलिस के सहयोग से 6 बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया। यह कार्रवाई राज्य सरकार के विभिन्न विभागों और एजेंसियों की ओर से जून माह को बाल मजदूरी के खिलाफ कार्रवाई माह या ‘एक्शन मंथ के रूप में मनाने के बाबत जारी अधिसूचना व निर्देशों के तहत की गई। इन निर्देशों में बाल मजदूरी की शिकायत वाले इलाकों में छानबीन करने व बच्चों को मुक्त कराने के लिए साझा अभियान चलाने के निर्देश दिए गए थे। सिंदुआर टोला ग्रामोदय विकास विद्यालय रांची ने जिले में बाल मजदूरी के खिलाफ जन जागरूकता अभियान भी चलाए जिसमें विभिन्न सरकारी विभागों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के अफसरों, सामुदायिक नेताओं और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। सिंदुआर टोला ग्रामोदय विकास विद्यालय रांची बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) का सहयोगी संगठन है।
जिला स्तरीय रेस्क्यू टीम के द्वारा रांची के बुंडू एवं तमाड़ के विभिन्न लाइन होटल से करीब 6 बच्चों को रेस्क्यू किया गया जिनकी उम्र 12 वर्ष से लेकर 17 वर्ष के बीच थी I सभी बच्चे लाइन होटल में बर्तन धोने, झाड़ू पोछा करने और मिस्त्री के साथ खाना बनाने के काम में सहयोग करते थे।
होटल मालिक के द्वारा 12 घंटा तक बच्चों से कार्य कराया जा रहा था। सभी बच्चे अत्यधिक गरीबी एवं मजबूरी के कारण होटल में काम कर रहे थे I जिला स्तरीय रेस्क्यू टीम के द्वारा सभी 6 बच्चों का रेस्क्यू कराया गया I रेस्क्यू टीम में जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी वेद प्रकाश तिवारी, श्रम अधीक्षक, रांची एतवारी महतो , राज्य समन्वयक बृजेश मिश्रा एवं सिंदुवार टोला ग्रामोदय विकास विद्यालय के सचिव राजेन कुमार के साथ जिला समन्वयक प्रीतम मजूमदार एवं परामर्शी धीरज कुमार राय के साथ ही रांची के जिला समन्वयक अंजलि झा, रांची के मंगल उरांव के साथ ही लेबर इंस्पेक्टर हेमंत कुमार नायक और संजीत कुमार रेस्क्यू टीम उपस्थित थे।
ये कई वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में पिछले कुछ महीने से काम कर रहे थे। शुरुआती जांच से पता चला है कि इनसे बेहद अमानवीय और शोषणकारी स्थितियों में काम लिया जा रहा था। स्वास्थ्य के लिए खतरनाक स्थितियों में मामूली पैसे पर इन्हें दिन रात खटाया जा रहा था जिससे इनकी सेहत व मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा था। बच्चों को मुक्त कराने के बाद जिम्मेदार नियोक्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है और पीड़ित बच्चों को पुनर्वास, मुआवजा व अन्य सुविधाएं दिलाने की प्रक्रिया जारी है जिसके वे अधिकारी हैं।
जून महीने को बाल श्रम के खिलाफ ‘एक्शन मंथ’ के तौर पर मनाया जाता है और चूंकि बाल दुर्व्यापार यानी बच्चों की ट्रैफिकिंग बाल मजदूरी का मुख्य कारण है, इसलिए नागरिक समाज संगठन इस दौरान पुलिस व प्रशासन के साथ मिलकर दुर्व्यापारियों और उनके गठजोड़ की शिनाख्त के लिए कड़ी नजर रखते हैं।
इस मौके पर कानून लागू करने वाली एजेंसियों और जिला प्रशासन को हरसंभव सहयोग का वादा करते हुए सिंदुआर टोला ग्रामोदय विकास विद्यालय रांची के निदेशक राजेन कुमार ने कहा, “शोषण व मजदूरी से मुक्त कराए गए हर बच्चे के शिक्षा के अधिकार, सुरक्षा व गरिमा की आज एक बार फिर बहाली हुई है। बाल श्रम बच्चों को उनके बचपन और मूल अधिकारों से महरूम कर देता है, लिहाजा इस समस्या से तत्काल निपटने की जरूरत है। बच्चों की जगह ढाबों और फैक्ट्रियों में नहीं बल्कि स्कूल में है। चूंकि ट्रैफिकिंग और बाल मजदूरी आपसे में गहरे तक जुड़े हैं, हम ट्रैफिकिंग की रोकथाम, बच्चों को मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन प्रशासन व कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ करीबी समन्वय के साथ काम करते रहेंगे। साथ ही, हम सुनिश्चित करेंगे कि हर बच्चे की देखभाल हो, समुचित पुनर्वास हो और उसे वो सभी सुविधाएं मिलें जिसका वह हकदार है।”
इस नेटवर्क की सबसे बड़ी ताकत इसका साझा निगरानी तंत्र और आपसी सहयोग है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के देश भर में फैले सहयोगी संगठन एक दूसरे की आंख-कान का काम करते हैं और आपस में सूचनाएं साझा करने के साथ ट्रैफिकिंग के मामलों की निगरानी करते हैं। नेटवर्क के खुफिया सूचना-साझाकरण तंत्र ने देश के विभिन्न हिस्सों में ट्रैफिकिंग के शिकार बच्चों की पहचान करने, उनका पता लगाने और उन्हें मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नतीजे में अप्रैल 2023 से मार्च 2026 के बीच 1.45 लाख से अधिक बच्चों को ट्रैफिकिंग से मुक्त कराया गया। इनमें अधिकांश मामले ऐसे थे, जिनमें बच्चों की ट्रैफिकिंग कर उन्हें बाल श्रम करने के लिए मजबूर किया गया था।

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