रथ यात्रा कल यानी 16 जुलाई को है। इस दिन महाप्रभु अपने भाई और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर मौसी बाड़ी जायेंगे। इस मौके पर रथ यात्रा मेला भी लगता है। भगवान जगन्नाथ अपने मौसी के यहां दस दिनों तक रहेगे। मेला भी दस दिनों तक रहेगा। आज महाप्रभु का नेत्रदान महोत्सव हुआ। भगवान 15 दिनों के एकांतवास के बाद बाहर आए हैं।

रथ यात्रा के दिन गुरुवार को सुबह चार बजे मंदिर का पट खुल जायेगा। भगवान के सभी विग्रहों को बारी बारी से 2.30 बजे दिन में रथ पर सवार किया जाएगा। शाम 4.45 बजे से पांच बजे तक रथ में रस्सा बांधा जाएगा। इसके बाद जयकारे के साथ रथ को मौसी बाड़ी ले जाया जायेगा। शाम 6 बजे तक रथ मौसीबाड़ी पहुंचेंगे। पूजा पाठ के बाद भगवान के सभी विग्रहों को बारी बारी से मौसीबाड़ी में प्रवेश कराया जाएगा।

मेला परिसर में दुकानें सज चुकी है। तरह तरह के झूले लग गये है। मौत का कुआं भी है। मेले में मिठाईयों की दुकानें सज गयी है। नगाड़ा मांदर भी उपलब्ध है। तलवार तीर धनुष भी बिक्री के लिए स्टॉल पर उपलब्ध है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किया गया है। मेला परिसर में जगह जगह सीसीटीवी कैमरा लगे हैं। भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक रूट में बदलाव किया गया है।








