आइसा का विरोध
रांची के नगड़ा टोली स्थित कार्यकारी महिला छात्रावास को मरम्मत एवं अनुरक्षण कार्य के नाम पर तीन दिनों के भीतर खाली कराने के उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी के आदेश का आइसा ने कड़ा विरोध किया है। छात्रावास परिसर में रह रही छात्राओं, नौकरीपेशा महिलाओं तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही युवतियों से बातचीत के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि प्रशासन ने बिना किसी ठोस वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें बेघर करने का निर्णय लिया है।
यह छात्रावास विशेष रूप से आदिवासी, ग्रामीण पृष्ठभूमि की महिलाओं के लिए सुरक्षित आवास का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। छात्रावास खाली होने की स्थिति में छात्राओं की पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, रोजगार और सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा। दूर-दराज़ क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं को महंगे निजी आवासों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिससे अनेक छात्राएं अपनी पढ़ाई और काम बीच में छोड़ने को विवश हो सकती हैं।
आइसा के संज्ञान में यह भी आया है कि छात्रावासों को एनजीओ के हवाले करने की नीति तथा सार्वजनिक सुविधाओं के निजीकरण की कोशिशें की जा रही है। साथ ही आगे जो कार्यकारी महिलाएं हैं, आगे छात्रावास में रहेगी, उनको अपने वेतन का 5%, 7%, 10%, और 15% देना होगा। जो छात्राओं और काम करने वाली महिलाओं के न ही न्यायसंगत है और उनके हितों के भी खिलाफ हैं। आइसा मांग करती है कि जब तक सभी छात्राओं के लिए सम्मानजनक, सुरक्षित और स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक छात्रावास खाली कराने का आदेश वापस लिया जाए। अन्यथा आइसा छात्रावास से सड़क तक व्यापक आंदोलन चलाने के लिए बाध्य होगी।
हॉस्टल परिसर निरीक्षण के दौरान आइसा रांची जिला अध्यक्ष विजय कुमार, जिला सचिव संजना मेहता, डीएसपीएमयू अध्यक्ष शालीन कुमार, लक्खीमणी मुंडा के साथ सैकड़ों प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाली छात्राएं और कार्यकारी महिलाएं मौजूद थी।





