रांची। शिव शिष्य परिवार के तत्वावधान में शिव शिष्यता की पृष्ठभूमि व्याप्ति एवं प्रयोजन विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला अग्रसेन भवन रांची में संपन्न हो गया। भारतवर्ष के विभिन्न राज्यों से आए शिव शिष्य परिवार को संबोधित करते हुए साहब हरिंद्रानंद जी का संदेश आओ चले शिव की ओर पर बरखा आनंद ने कहा कि आज से 8 वर्ष पूर्व साहब लगभग 400 शिष्यों को संबोधित कर रहे थे थोड़ी देर के बाद उन्होंने उपस्थित लोगों से पूछा कि किसी को कुछ भी पूछना है कोई उत्तर नहीं मिलने पर वह चलने को तैयार हुए तभी एक मर्म भेदी वाक्य उनके मन में आया और उन्होंने कहा मुझे कुछ कहना है और उन्होंने कहा आओ चले “शिव की ओर ” वह कहते थे कि यह मेरा कथन नहीं था अपितु सुदूर प्रांतों से आई हुई एक आवाज थी एक दर्द था। यह सृष्टि के शून्यकाल से आती हुई एक मद्धिम मधुर ध्वनि तरंगें हैं । श्रीमती आनंद ने कहा कि देश समाज परिवार के मर्यादा को सुदृढ़ करते हुए भगवान शिव की ओर चलना और चलते ही रहना है।

गुरु सदगुरु एवं जगतगुरु विषय पर अर्चित आनंद ने कहा कि गुरु का शाब्दिक अर्थ अंधकार को दूर करने वाला माना गया है। मनुष्य के अंदर छाए गहन अंधकार को मिटाने की जो जवाब देही ले उसे गुरु कहते हैं । गुरु शिष्य के मन में साधना जप आदि विभिन्न विधियों द्वारा शिव भाव का आवेश जागते हैं। जबकि सदगुरु मात्र अपनी दया से ही शिष्य के मन में परमात्मा प्रेम का अंकुरण कर देते हैं । सदगुरु की दया ही शिष्य को शिव बनाती है। जगतगुरु को सभी सदगुरुओं का गुरु कहा गया है । जगतगुरु के शाब्दिक अर्थ से ही स्पष्ट है कि संसार का कोई भी व्यक्ति उन्हें अपना गुरु मानेगा तो उस व्यक्ति को शिव बनाने की जवाब देही लेनी होगी ।

वहीं शिव शिष्य परिवार के सचिव अभिनव आनंद ने कहा कि जागतिक रोशनी लोगों को रास्ता दिखाने के लिए होती है जबकि आध्यात्मिक रोशनी लोगों को शिव तक पहुंचती है। कार्यशाला का समापन गौतम कुमार ने किया, वही कार्यशाला को सफल बनाने में राजेश गौतम शिवकुमार विश्वकर्मा रजनीश रणधीर आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही । कार्यशाला में भारत के विभिन्न प्रांतो से आए लगभग 550 लोगों ने हिसार लिया








