बीआईटी मेसरा रांची का स्थापना दिवस
राँची। बीआईटी मेसरा रांची का स्थापना दिवस मनाया गया। मौके पर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ही नहीं , बल्कि युवाओं को ‘जॉब क्रिएटर’ बनने के लिए प्रेरित करना भी है। उन्होंने कहा कि बीआईटी मेसरा देश के अग्रणी तकनीकी एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में अपना विशिष्ट स्थान रखता है। सात दशकों से अधिक की अपनी गौरवशाली यात्रा में इस संस्थान ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं तकनीकी उत्कृष्टता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
राज्यपाल बुधवार 15 जुलाई का बीआईटी मेसरा, राँची के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थान का स्थापना दिवस केवल उसकी स्थापना का स्मरण नहीं, बल्कि उसकी गौरवशाली यात्रा, उपलब्धियों तथा भविष्य के संकल्पों का भी उत्सव होता है।
तकनीकि के क्षेत्र में तेजी से हो रहा है बदलाव बीआईटी मेसरा की होगी बड़ी जिम्मेदारी
राज्यपाल ने कहा कि आज विश्व Artificial Intelligence, रोबोटिक्स, क्वांटम कम्प्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा, हरित ऊर्जा तथा डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़ी तेजी से परिवर्तन कर रहा है। ऐसे में तकनीकी संस्थानों की भूमिका बढ़ जाती है। उनका काम केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि उन्हें नवाचार, अनुसंधान, स्टार्टअप, उद्यमिता तथा समाज की चुनौतियों के समाधान विकसित करने के सशक्त केंद्र के रूप में कार्य करना होगा। बीआईटी मेसरा को अनुसंधान, उद्योग-अकादमिक सहयोग तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के नए आयाम स्थापित करना होगा । भारत के युवाओं को नई तकनीकों का केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि उनका सृजनकर्ता एवं वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनना होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में बीआईटी मेसरा जैसे संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
बीआईटी मेसरा अपनी तकनीकी क्षमता का उपयोग विकसित भारत बनाने में लगायें
राज्यपाल ने कहा कि झारखण्ड प्राकृतिक एवं खनिज संसाधनों से समृद्ध राज्य है। खनन, इस्पात, ऊर्जा, कृषि, वन, पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण तथा सतत विकास जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार की व्यापक संभावनाएँ हैं। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि बीआईटी मेसरा अपनी वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षमता का उपयोग राज्य की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने तथा समाज की वास्तविक चुनौतियों के निराकरण में अग्रणी भूमिका निभाएगा।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि तकनीकी दक्षता के साथ-साथ अनुशासन, नैतिकता, संवेदनशीलता, नेतृत्व क्षमता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व भी सफलता के लिए समान रूप से आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि एक श्रेष्ठ अभियंता वही है, जो अपनी तकनीकी दक्षता का उपयोग मानवता के कल्याण एवं राष्ट्र निर्माण के लिए करे।
राज्यपाल आशा व्यक्त किया कि बीआईटी मेसरा आने वाले वर्षों में ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार एवं उत्कृष्टता के नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए ‘विकसित भारत’ के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा। उन्होंने सभी से ज्ञान, विज्ञान, नवाचार एवं उत्कृष्टता के माध्यम से आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।








