प्रभु एकांतवास में चले गये है। देव स्नान यानि स्नान पुर्णिमा के दिन महाअभिषेक के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र स्वामी व बहन सुभद्रा के साथ 15 दिनों के लिए एकांतवास में चले जाते हैं। इस दौरान मंदिर के पट बंद रहता है। और सामान्य श्रद्धालुओं को दर्शन नहीं होते हैं। मान्यता है है कि अत्यधिक स्नान हो जाने के कारण भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं। इस कारण वे एकांतवास में 15 दिनों तक रहते हैं। इस दौरान प्रभु को औषधीय भोग और आर्युवेदिक उपचार किया जाता है।
वहीं 15 जुलाई को नेत्रदान के साथ बाहर आयेंगे। और 16 जुलाई को रथ यात्रा निकलेगी। भगवान अपने भाई बहन के साथ मौसी घर रथ पर सवार होकर जाते हैं। रांची के जगन्नाथपुर स्थित मंदिर में रथ यात्रा को लेकर तैयारी शुरू कर दिया गया है। भगवान मौसी के वहां नौ दिनों तक रहते हैं। उसके बाद 25 जुलाई को वहां से मुख्य मंदिर लौटेंगे।
जगन्नाथ मंदिर में देव स्नान के दिन बारिश भी जम कर हुई। लोगों का कहना है कि देवस्नान के दिन बारिश होना शुभ होता है। वहीं देव स्नान के दिन मंदिर परिसर में भक्तों की अपार भीड़ थी। लगा मानो जय जगन्नाथ के जयघोष से पूरा लोक गूंजने लगा






