राष्ट्रीय सरना धर्म सम्मेलन में सरना धर्म को संवैधानिक मान्यता दिलाने की मांग उठी। रांची जिले के रातु प्रखंड के मखमंदारो में राष्ट्रीय आदिवासी समाज सरना धर्म रक्षा अभियान के तत्वाधान में आयोजित सरना सम्मेलन में सरना धर्म को मान्यता देने का मांग किया गया।
कार्यक्रम की शुरुवात वीर शहीद सिदो कान्हू चाँद भैरव फूलों झानू और शिक्षाविद्य डॉक्टर करमा उरांव सरना रत्न वीरेंद्र भगत एवं एतो उरांव के चित्र पर माल्यार्पण कर नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई । कार्यक्रम में बोलते हुए TAC सदस्य नारायण उरांव ने कहा कि केंद्र सरकार से सरना धर्म कोड नहीं मिलना समझ के परे है । देश में कम जनसंख्या वाले धर्म को संवैधानिक दर्जा प्राप्त है ।लेकिन सरना लिखने वाले करोड़ों सरना धर्मावलम्बियों को संवैधानिक कोड नहीं मिलना आदिवासियों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है ।
केंद्रीय सरना संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष शिवा कच्छप ने कहा कि सरना धर्म कोड भारत के 17 करोड़ आदिवासियों के अस्तित्व ,पहचान ,हिस्सेदारी और एकता के लिए जरूरी है । केंद्र सरकार सरना धर्मकोड पर चुप है। अब समय आ गया है कि दिल्ली में दस्तक देने का । उन्होंने कहा कि समय आ गया है केंद्र सरकार आदिवासियों को धार्मिक आजादी दे नहीं तो देशभर में धार्मिक क्रांति होगी ।
उड़ीसा के धर्म अगुवा बालकृष्ण एक्का ने भी अपना विचार व्यक्त किया ।वही कार्यक्रम में असम बंगाल उड़ीसा बिहार छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से भी प्रतिनिधि मंडल शामिल हुए ।कार्यक्रम के अध्यक्षता सुकरा उरांव और संचालन सोमनाथ उरांव ने किया कार्यक्रम में मुख्य रूप से सोमनाथ उरांव ,विकास उरांव ,सुनील कच्छप ,रजनी उरांव ,सुमन तिर्की , मिताली उरांव , बिनसरिया उरांव , सुकरा तिर्की लक्ष्मी भगत सुखदेव मुख्य रूप से शामिल है






